विस्तार: एक दूरगामी प्रभाव वाले तथा महत्वपूर्ण फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने 10 नवम्बर 2016 को पंजाब राज्य सरकार को आदेश दिया कि वह सतलज-यमुना लिंक नहर (Satluj-Yamuna Link Canal) का जल हरियाणा (Haryana) के साथ साझा करे। उसने यह आदेश देते हुए पंजाब के विवादास्पद कानून Punjab Termination Agreement Act (PTAA) को भी अवैध करार दिया।
– सर्वोच्च के इस आदेश का जहाँ हरियाणा सरकार ने स्वागत किया वहीं पंजाब में इसके खिलाफ विरोध के स्वर बुलंद हुए। यहाँ तक की पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने भी इसको मानने से इंकार कर दिया। वहीं कांग्रेस इस आदेश के खिलाफ उग्र होते हुए दिखी जब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह (Amrinder Singh) ने आरोप लगाया कि अकाली सरकार ने इस मामले की मजबूत पैरवी सर्वोच्च न्यायालय में नहीं की। उन्होंने अपनी अमृतसर लोकसभा सीट से इस्तीफा भी दे दिया जबकि सभी कांग्रेसी विधायकों ने अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।
– उल्लेखनीय है कि 214 किलोमीटर लम्बी सतलज-यमुना लिंक नहर को तैयार करने की तैयारी 1966 में पंजाब को काटकर हरियाणा को बनाए जाने के बाद की गई थी। लेकिन पंजाब ने इस परियोजना का सदैव विरोध किया क्योंकि उसका मानना था कि पानी के बटंवारे से उसकी कृषि प्रभावित होगी। वर्ष 2004 में अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने Punjab Termination Agreement Act (PTAA) नामक विवादास्पद कानून को पारित किया जिसके द्वारा उसने पड़ोसी राज्यों से अपने सभी जल-बँटवारा संधियों को निरस्त कर दिया था।
– लेकिन तब तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने इस कानून की वैधता का मामला सर्वोच्च न्यायालय को सौंप दिया था। सर्वोच्च न्यायालय ने तब कहा था कि इस नहर के निर्माण काम को बेरोकटोक पूरा किया जाना चाहिए।
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